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जातिगत जनगणना, पिछड़ों के आरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 9 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गृह मंत्री से मिलेंगे

रांची ;  देश में जातिगत जनगणना (Caste census) को लेकर लंबे वक्त से बहस छिड़ी है, इसे लेकर जातिगत जनगणना को लेकर शनिवार को झारखंड के मुख्यमंत्री के साथ सभी राजनीतिक दल गृह मंत्री से मुलाक़ात करेंगे. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री से जातिगत जनगणना कराने के लिए समय मांगा था, लेकिन प्रधानमंत्री की व्यस्तता की वजह से इस काम की ज़िम्मेदारी गृह मंत्री को दी गई है. दरअसल राज्य सरकार जातिगत जनगणना और सरना धर्म कोड लागू होने की मांग कर रहे हैं. बता दें कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ कल गृह मंत्री से मिलने वाले थे. परंतु दौरा रद्द हो जाने की वजह से अब CM आज की जगह कल अपने दिल्ली दौरे के लिए निकलेंगे. और गृह मंत्री से मुलाक़ात 26 सितंबर को किया जायेगा.

इस मसले पर अब केंद्र सरकार (Central Government) ने अपना रुख साफ किया है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में एक हलफनामा दायर करते हुए केंद्र सरकार ने कहा है कि जनगणना में OBC जातियों की गिनती एक लंबा और कठिन काम है. सरकार  द्वारा दाखिल जवाब में कहा गया है कि साल 2011 की जनगणना के मद्देनज़र सरकार के पास हर जाति की गिनती का कोई ठोस डाटा नहीं है. सरकार का मानना है कि साल 2011 में किया गया सोशल इकॉनोमिक और कास्ट सेंसस गलतियों से भरा हुआ है. अपने जवाब में केंद्र ने 2021 की जनगणना में जाति का सेक्शन जोड़ने का विरोध किया है. सरकार ने कहा है कि ऐसा करना बेहद ही कठिन होगा, इससे डाटा में गड़बड़ी हो सकती है. ऐसे में 2021 की जनगणना में इसे शामिल नहीं किया जाएगा. सरकार के इस रुख से उन तमाम राजनीतिक दलों, संगठनों को झटका लगा है जो जातिगत जनगणना की मांग कर रहे हैं। गृह मंत्री अमित शाह से कल मुख्यमंत्री के साथ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर, विधायक दल के नेता आलमगीर आलम समेत विभिन्न राजनीतिक दल, जैसे झामुमो, कांग्रेस, राजद, CPI, CPIM, CPIML, MCC प्रतिनिधि मंडल में शामिल होंगे. इस मुलाकात में जातिगत जनगणना और सरना धर्म कोड पर बात होगी.

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