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काशी से क्योटो बनने की होड़ में नष्ट हुई तमाम धरोहरें, फिल्म निर्माता ने अपनी डॉक्यूमेंट्री ‘ताम’ में उकेरा, जल्द होगी रिलीज

डॉक्यूमेंट्री में दिखेगी पुरानी काशी

(फिल्म निर्माता विश्वनाथ तिवारी कहते हैं कि काशी विश्वनाथ मंदिर के इर्दगिर्द के सैकड़ों साल पुराने 396 मकानों का अधिग्रहण कर उन्हें ध्वस्त किया गया )

वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ धाम मूर्त रूप ले रहा है। इसके लिए काशी विश्वनाथ मंदिर के इर्दगिर्द के सैकड़ों साल पुराने 396 मकानों का अधिग्रहण कर उन्हें ध्वस्त किया गया। इस प्रोजेक्ट से काशी की पहचान पक्कामहाल क्षेत्र के लाहौरी टोला, सरस्वती फाटक और नीलकंठ, मीर घाट, ललिता घाट व मणिकर्णिका घाट का कुछ हिस्सा अब सिर्फ किस्से-कहानियों में ही रह गए हैं।

विश्वनाथ मंदिर के समीप शकरकंद गली में रहने वाले युवा फिल्म निर्माता-निर्देशक विश्वनाथ तिवारी ने सैकड़ों साल पुरानी विरासत को विकास के नाम पर ध्वस्त होते हुए देखा। इसे लेकर उन्होंने 30 मिनट की लघु फिल्म ‘ताम’ बनाई है। ‘ताम’ जल्द ही ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज होगी। विश्वनाथ का क्या अनुभव रहा और उन्होंने फिल्म कैसे बनाई, इसे लेकर दैनिक भास्कर ने उनसे बातचीत की। बातचीत के प्रमुख अंश…।

सवाल : ताम शब्द का क्या अर्थ है और इसकी क्या कहानी है?
जवाब : दुनिया के सबसे प्राचीन शहर बनारस में प्रेम और विद्रोह की एक कहानी ताम विरासत और संस्कृति के संरक्षण के महत्व को दर्शाती है। फिल्म का शीर्षक ताम संस्कृत भाषा से लिया गया है। इसका अर्थ है विकास के कारण विनाश… और इसे ही फिल्म में दर्शाया गया है। यह 75 वर्षीय पंडित उमा की कहानी है, जो अपने पुश्तैनी किराए के घर का अधिग्रहण करने वाली सरकार के खिलाफ जीत की तलाश में संघर्ष करते हैं। उनकी कहानी तब सामने आती है जब काशी को क्योटो बनाने की धुन में लगे नौकरशाहों द्वारा मकान से उन्हें निकाल दिए जाने पर उनकी मौत हो जाती है।

सवाल : यह फिल्म बनाने का विचार कैसे आया?
जवाब : पवित्र नगरी काशी में प्राचीन घाटों के बीच पलने-बढ़ने के कारण मुझे यहां की मिट्‌टी और पक्कामहाल क्षेत्र से अगाध लगाव है। पक्कामहाल क्षेत्र के बगैर काशी की पहचान अधूरी है। हमने अपनी आंखों के सामने सैकड़ों साल पुराने मकानों का अधिग्रहण और फिर उनको ध्वस्त होते हुए देखा। अब वह गलियां नहीं दिखाई देती जहां 2 लोगों को भी एकसाथ पैदल जाने में दिक्कत होती थी। हमारी फिल्म का विषय उस मुद्दे पर है जिसे संरक्षित करने के लिए यहां के लोगों को एकजुट होने की आवश्यकता थी। सरकार की इस योजना को वाराणसी की विशाल आबादी के समर्थन से लेखक काशीनाथ सिंह और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जैसे दिग्गजों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा था।

सवाल : फिल्म में कहां के कलाकार हैं और इसकी कहां शूटिंग हुई?
जवाब : फिल्म के कलाकार वाराणसी और प्रयागराज के हैं। सभी रंगमंच से जुड़े हुए हैं। फिल्म में पक्कामहाल क्षेत्र के मकानों के ध्वस्तीकरण के वास्तविक दृश्य भी शामिल किए गए हैं। इसकी शूटिंग वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास के क्षेत्र व यहां के गंगा घाटों और प्रयागराज में हुई है। दर्शकों को फिल्म देखकर खांटी बनारसीपन का एहसास होगा। अविमुक्त फिल्म्स के बैनर तले निर्मित ताम मेरे और गौरव सिंह द्वारा लिखित और निर्देशित है।

सवाल : स्वतंत्र फिल्म निर्माता के तौर आपको इस फिल्म को बनाने में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
जवाब : इस तरह के संवेदनशील विषय पर एकमात्र चुनौती फिल्म को रिलीज कराना है। जब से कोरोना महामारी फैली है, दर्शकों तक फिल्मों की पहुंच धीमी हो गई है। इसके अलावा अपने दर्शकों तक पहुंचने के लिए स्वतंत्र फिल्म निर्माता को एक उपयुक्त ओटीटी प्लेटफॉर्म ढूंढना एक कठिन काम है।

सवाल : स्वतंत्र फिल्म निर्माता के तौर पर आपका अनुभव कैसा रहा?
जवाब : स्वतंत्र फिल्म निर्माता बनना और निर्देशन हमेशा से मेरा एक सपना था। द होली फिश और धतूरा जैसी फिल्मों में मैने सहायक निर्देशक के रूप में काम किया। इनसे आत्मविश्वास जागा और अपनी फीचर फिल्म ताम को मूर्त रूप देने के काम में जुट गया। इस फिल्म के रिलीज होने के बाद बनारस से जुड़े ऐसे ही कुछ और महत्वपूर्ण ईशू हैं जिन पर जल्द ही काम शुरू किया जाएगा।

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