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एलएसी पर पीछे हट रहे चीन की क्या है कुटिल चाल? कहीं 1962 का धोखा दोहराने की साजिश तो नहीं?

नई दिल्ली I LAC पर बुरी तरह पिटने के बाद चीन की सेनाएं पैंगान्ग से उलटे पांव लौट चुकी है. सीमा पर बाकी जगहों से भी चीन अपना बोरिया बिस्तर बांधने की तैयारी कर चुका है. दूसरे विवादित मुद्दों पर भी चीन का रुख नरम है. लेकिन क्या चीन की नीयत भी साफ है? ये सवाल इसलिए पैदा हुआ है कि क्योंकि अंतरिक्ष से कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं..जिन्हें देखकर चीन के 1962 वाले धोखे की याद आ जाती है.

LAC पर 9 महीने की तनातनी के बाद चीन की सेना ने हारकर अपने कदम जरूर पीछे खींचे हैं, लेकिन क्या चीन के इरादे भी नेक हैं, क्या चीन कोई चाल तो नहीं चल रहा है. चीन के चाल और चरित्र को देखते हुए ये सवाल तो शुरू से उठ रहे हैं. लेकिन अब एक ऐसी सैटेलाइट तस्वीर सामने आई है, जिससे ये शक और गहरा हो जाता है.

रुटोग काउंटी की जो सैटेलाइट तस्वीर अब सामने आई है, उससे चीन की नीयत पर शक इसलिए गहरा जाता है,क्योंकि इस तस्वीर में साफ नजर आ रहा है कि रुटोग काउंटी में चीन ने जबरदस्त सैन्य जमावड़ा कर लिया है. भारी मात्रा में हथियार और गोला बारूद जमा किया जा रहा है.

सैटेलाइट तस्वीर में रूटोग मिलिट्री गैरिसन दिखाई दे रहा है, जिसमें कंटेनर जैसी चीज रखी है. ऐसे कंटेनर सैन्य छावनियों में हथियार और गोला-बारूद रखने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. इसके अलावा भी चीन ने यहां बहुत से नए निर्माण किए है.इस तस्वीर में एक जगह पर काफी टेंट नजर आ रहे हैं, ये टेंट सैनिकों के रहने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. माना जा रहा है कि LAC से लौटे सैनिकों को चीन सेना ने यहीं रोका है और वो यहां मौजूद हैं.

इसी तस्वीर में हीटेड केबिन्स भी दिख रहे हैं, ऐसे केबिन का इस्तेमाल चीन की सेना में अफसरों के लिए रहने के लिए किया जाता है. इतनी बड़ी संख्या में अफसरों के केबिन होने का यही मतलब है कि यहां भारी संख्या में सैन्य अफसर भी मौजूद हैं.इन तस्वीरों के सामने आने के बाद चीन पर शक और गहरा हो जाता है, इसलिए जानकार मानते हैं कि भारत को और सावधान होने की जरुरत है.

चीन ने रुटोग बेस को डोकलाम विवाद के बाद काफी विकसित क्या है, जाहिर है उसका मकसद इसे भारत के खिलाफ इस्तेमाल करने का है. रूटोग काउंटी की भौगोलिक स्थिती देखकर भी इसकी अहमियत को समझा जा सकता है. रूटोग काउंटी पैंगान्ग से काफी करीब है, पैगॉन्ग लेक से रुटोग काउंटी की दूरी महज 100 किलोमीटर है.

यानी अगर तनाव बढ़ा तो चीन सेना को गोला बारूद और हथियारों के साथ LAC तक पहंचने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा.यहां से फॉरवर्ड लोकेशन पर पहुंचाना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा, चीन 1962 की लड़ाई से पहले भी इसी तरह से पीछे गया था और फिर धोखे से हमला बोला था, इसलिए चीन से बेहद सावधान रहने की जरूरत है.

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